अधूरे सपने

सपनोंसे लगता है डर, फिरसे बिखर ना जाऊ मैं

तुम्हें पाने की चाहत में कहीं खुद खो ना जाऊ मैं।

 _____________________________

इंतजार किया था मैंने बरसों

की प्यार की बारिश भिगोयेगी

बूझ गयी वह लौ ऐसे

फिरभी मुझको तरसायेगी

नंगे पाँव चल रही हूँ, कहीं बंजर बन ना जाऊ मैं,

तुम्हें पाने की चाहत में कहीं खुद खो ना जाऊ मैं।

_____________________________
बिखरे पड़े हैं दिल के टुकड़े

जो चुभते हैं अब सीने में

समेटू इन्हें अब कैसे

उम्मीद नहीं है जीने में

उठाया ना करो अभी, कहीं नाउम्मीद ना हो जाऊ मैं

तुम्हें पाने की चाहत में कहीं खुद खो ना जाऊ मैं।
(c)ashwininaik

Advertisements

4 Comments Add yours

  1. Saritha says:

    Wha wha…dil ko chuliya..

    Liked by 1 person

    1. ashacumen says:

      Thanks dear!

      Like

  2. Umesh Shet says:

    Speechless…Dil ka Dard , kalam me utar aaya …

    Liked by 1 person

    1. ashacumen says:

      Thanks Bhai! Means a lot!!

      Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s